Sunday, October 26, 2014

महान बौद्ध दार्शनिक और श्रीलंका के दूरद्रस्टा श्रीमंत अनगरिका धर्मापाला पर स्मारक डाक टिकट जारी करने के अवसर पर आयोजित समारोह को संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी और विधि एवं न्याय मंत्री श्री रवि शंकर

महान बौद्ध दार्शनिक और श्रीलंका के दूरद्रस्टा श्रीमंत अनगरिका धर्मापाला पर स्मारक डाक टिकट जारी करने के अवसर पर आयोजित समारोह को संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी और विधि एवं न्याय मंत्री श्री रवि शंकर प्र
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत डाक विभाग ने महान बौद्ध दार्शनिक और श्रीलंका के दूरद्रस्टा श्रीमंत अनगरिका धर्मापाला पर स्मारक डाक टिकट जारी किया है।

राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने एक समारोह में यह स्मारक डाक टिकट जारी किया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी और विधि एवं न्याय मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद, भारत में श्रीलंका के उच्चायुक्त, सांसद मीनाक्षी लेखी, विदेश सचिव, सचिव, डाक विभाग और अन्य विशिष्ट अतिथि तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से भारत और श्रीलंका कुदरती सहयोगी रहे हैं तथा बौद्ध धर्मदूत श्रीमंत अनगरिका धर्मापाला की उपलब्धियों की स्मृति में डाक टिकट जारी होने से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे।

इस अवसर पर संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी और विधि एवं न्याय मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि वह स्वामी विवेकानंद की 150 वीं वर्षगांठ के अवसर पर स्मारक डाक टिकट जारी होने के समय श्रीलंका में थे। वह डाक टिकट श्रीलंका सरकार ने जारी किया था। वहां श्रीलंका सरकार के एक अधिकारी ने श्रीमंत अनगरिका धर्मापाला पर डाक टिकट का विचार प्रकट किया था। सौभाग्य से आज वह विचार साक्षात आकार ले रहा है और डाक विभाग का मंत्री होने के नाते उन्हें यह सौभाग्य मिला है।

श्री प्रसाद ने कहा कि स्वामी विवेकानंद और श्रीमंत अनगरिका धर्मापाला 1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद में दो महान धर्मों का प्रतिनिधित्व किया था। श्रीलंका सरकार की तरफ से स्वामी विवेकानंद को सम्मान देने और भारत सरकार की ओर से श्रीमंत अनगरिका धर्मापाला पर डाक टिकट जारी करने से सामूहिक बुद्धि की अनुकरणीय विरासत मजबूत होगी और भारत एवं श्रीलंका के बीच साझा जिम्मेदारी समूचे एशिया का मार्गदर्शन करती रहेगी। 

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